मैं धरती हूँ- Meri Kahani
मैं धरती हूँ मैं धरती हूँ, सृष्टि का आधार, जीव-जंतुओं और मानव के जीवन का पालनहार। अनंत काल से मैं सब कुछ सहती आई हूँ—हरियाली की चादर ओढ़े, नदियों के गीत सुनते, पर्वतों की छाया में विश्राम करती। मैंने फूलों की खुशबू दी, फसलों का अन्न दिया, और हर जीव को जीने का आसरा। लेकिन आज मैं व्यथित हूँ। मेरे सीने को मशीनों ने चीरा, मेरे वक्ष से पेड़ों को उजाड़ा, और मेरी कोख को विषैले रसायनों से भर दिया। फिर भी मैं चुप हूँ, क्योंकि मेरी ममता अटूट है। मैं बस यही चाहती हूँ—मेरा सम्मान करो, मुझे बचाओ, ताकि मैं हमेशा तुम्हारा सहारा बनी रहूँ मैं धरती हूँ, इस ब्रह्मांड की सबसे सुंदर और जीवन से भरपूर ग्रह में से एक। मेरी उत्पत्ति लगभग ४.५४ अरब वर्ष पूर्व हुई थी, जब सूर्य और अन्य ग्रहों के साथ मैं भी एक विशाल गैस और धूल के बादल से बनी थी। मेरी शुरुआती जिंदगी बहुत ही कठिन थी, जब मैं लगातार उल्कापिंडों और अन्य ग्रहों के टुकड़ों से टकराती रहती थी। लेकिन धीरे-धीरे, मैंने अपना आकार और स्थिरता हासिल की। मेरी सतह पर पानी की उपस्थिति ने जीवन को जन्म दिया, और मैंने अपने पहले जीवन रूपों को देखा। शुरुआत में, मेरी...