मैं पेड़ हूँ - True Story
मैं पेड़ हूँ मैं पेड़ हूँ। धरती का श्रंगार, जीवन का आधार, और प्रकृति का वरदान। मैं वही हूँ जिसने इस धरती को हरा-भरा बनाया, जीव-जंतुओं को आश्रय दिया और हवा में प्राणवायु भर दी। मैं सृष्टि के आरंभ से यहाँ हूँ, आपकी सेवा में। मेरी शाखाएँ आसमान को छूने की कोशिश करती हैं, लेकिन मेरी जड़ें हमेशा धरती से जुड़ी रहती हैं। आज मैं अपनी आत्मकथा आपके साथ साझा करना चाहता हूँ। जब इस धरती पर जीवन का आरंभ हुआ, तब मैं भी उगा। मेरी पत्तियों ने सूरज की रोशनी को अपने भीतर समेटकर ऊर्जा बनाई। मेरी छाँव में जीव-जंतु सुस्ताने लगे, और मेरी टहनियों पर पक्षियों ने घोंसले बनाए। मैंने धरती की मिट्टी को समृद्ध बनाया और नदियों को शुद्ध रखा। मेरी जड़ों ने धरती को बाँधकर बाढ़ से बचाया। मैं प्रकृति का एक अभिन्न हिस्सा हूँ, जो जीवन के हर चक्र में शामिल है। मेरी पत्तियाँ, फल, फूल और लकड़ी सबके लिए उपयोगी हैं। मैंने फलों से भूख मिटाई, अपनी लकड़ी से घर बनाए, और अपने पत्तों से दवाइयाँ दीं। मेरी छाल और जड़ें भी कई बीमारियों का इलाज करती हैं। मेरी शाखाएँ झूलों का सहारा बनीं, और मेरी छाँव ने पथिकों को आराम दिया। लेकिन मेर...
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